Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.22.16: हे मनुष्यों के स्वामी! ऐसा कौन स्वाभिमानी क्षत्रिय होगा जो अपने जातिबंधुओं की रक्षा करना परम धर्म है, यह जानते हुए भी युद्ध करके अद्वितीय एवं सनातन स्वर्ग में जाना न चाहेगा?॥16॥ | mahabharat अध्याय 2.22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
को हि जानन्नभिजनमात्मवान् क्षत्रियो नृप।
नाविशेत् स्वर्गमतुलं रणानन्तरमव्ययम्॥ १६॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! ऐसा कौन स्वाभिमानी क्षत्रिय होगा जो अपने जातिबंधुओं की रक्षा करना परम धर्म है, यह जानते हुए भी युद्ध करके अद्वितीय एवं सनातन स्वर्ग में जाना न चाहेगा?॥16॥
O lord of men! Who would be such a self-respecting Kshatriya who, despite knowing that protecting his caste brethren is the ultimate religion, would not want to go to the unique and everlasting heaven by fighting a war?॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥