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mahabharat 2.22.14: तुम अपने ही बन्धुओं के हत्यारे हो और हम दीन-दुःखी लोगों की रक्षा करते हैं; इसलिए अपने बन्धुओं की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से हम तुम्हें मारने के लिए यहाँ आये हैं॥14॥   |   mahabharat अध्याय 2.22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.22.14 
ते त्वां ज्ञातिक्षयकरं वयमार्तानुसारिण:।
ज्ञातिवृद्धिनिमित्तार्थं विनिहन्तुमिहागता:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तुम अपने ही बन्धुओं के हत्यारे हो और हम दीन-दुःखी लोगों की रक्षा करते हैं; इसलिए अपने बन्धुओं की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से हम तुम्हें मारने के लिए यहाँ आये हैं॥14॥
 
You are the killer of your own brethren whereas we protect the poor and the distressed; therefore, with the objective of increasing the number of our own brethren, we have come here to kill you.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)