श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.22.13 
यस्यां यस्यामवस्थायां यद् यत् कर्म करोति य:।
तस्यां तस्यामवस्थायां तत् फलं समवाप्नुयात्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जो कोई भी कर्म किसी भी अवस्था में करता है, उसे उसका फल उसी अवस्था में प्राप्त होता है ॥13॥
 
Whoever performs any action in any state, receives its fruits in the same state. ॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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