श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.22.11 
मनुष्याणां समालम्भो न च दृष्ट: कदाचन।
स कथं मानुषैर्देवं यष्टुमिच्छसि शंकरम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
किसी भी देवता की पूजा के लिए मनुष्यों की हत्या कभी नहीं देखी गई। फिर तुम मनुष्यों की हत्या करके कल्याणकारी देवता भगवान शिव की पूजा कैसे करना चाहते हो?॥11॥
 
Killing of human beings for the worship of any deity has never been seen. Then how can you wish to worship the benevolent deity Lord Shiva by killing human beings?॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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