श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 22: जरासंध और श्रीकृष्णका संवाद तथा जरासंधकी युद्धके लिये तैयारी एवं जरासंधका श्रीकृष्णके साथ वैर होनेके कारणका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.22.1 
जरासंध उवाच
न स्मरामि कदा वैरं कृतं युष्माभिरित्युत।
चिन्तयंश्च न पश्यामि भवतां प्रति वैकृतम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
जरासन्ध ने कहा - ब्राह्मणों! मुझे स्मरण नहीं आता कि मैंने कभी आपसे शत्रुता की हो। बहुत विचार करने पर भी मुझे आपके प्रति अपने द्वारा किया गया कोई अपराध नहीं दिखाई देता॥1॥
 
Jarasandha said - Brahmins! I do not remember when I have ever been hostile towards you. Even after thinking a lot, I do not see any crime committed by me against you.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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