श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  2.21.d3 
वृषभस्य तमालस्य महावीर्यस्य वै तथा।
गन्धर्वरक्षसां चैव नागानां च तथाऽऽलया:॥)
 
 
अनुवाद
वृषभ, महाबली तमाल, गंधर्व, राक्षस और नागों के निवास भी उन पर्वतों की शोभा बढ़ाते हैं।
 
The abodes of Taurus, the mighty Tamala, Gandharvas, demons and serpents also enhance the beauty of those mountains.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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