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mahabharat 2.21.9: यहाँ अर्बुद और शक्रवापी नामक दो नाग रहते हैं, जो अपने शत्रुओं को कष्ट देते हैं। यहाँ स्वस्तिक नाग और मणि नाग के भी उत्तम निवास हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 2.21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.21.9 
अर्बुद: शक्रवापी च पन्नगौ शत्रुतापनौ।
स्वस्तिकस्यालयश्चात्र मणिनागस्य चोत्तम:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यहाँ अर्बुद और शक्रवापी नामक दो नाग रहते हैं, जो अपने शत्रुओं को कष्ट देते हैं। यहाँ स्वस्तिक नाग और मणि नाग के भी उत्तम निवास हैं॥9॥
 
Here live two serpents named Arbuda and Shakravapi, who torment their enemies. Here are also the excellent abodes of Swastika Naag and Mani Naag.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)