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श्लोक  2.21.7 
अङ्गवङ्गादयश्चैव राजान: सुमहाबला:।
गौतमक्षयमभ्येत्य रमन्ते स्म पुरार्जुन॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे अर्जुन! पूर्वकाल में अंग-वंग जैसे पराक्रमी राजा गौतम के घर आकर सुखपूर्वक रहते थे।
 
Arjun! In the past, mighty kings like Ang-Vanga used to come to Gautam's house and live happily.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)