Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.21.52: विधाता ने क्षत्रियों की भुजाओं में बल भर दिया है। हे राजन! यदि तुम आज उसे देखना चाहो तो अवश्य देखोगे। 52।   |   mahabharat अध्याय 2.21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.21.52 
स्ववीर्यं क्षत्रियाणां तु बाह्वोर्धाता न्यवेशयत्।
तद् दिदृक्षसि चेद् राजन् द्रष्टास्यद्य न संशय:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
विधाता ने क्षत्रियों की भुजाओं में बल भर दिया है। हे राजन! यदि तुम आज उसे देखना चाहो तो अवश्य देखोगे। 52।
 
The Creator has filled the strength of the Kshatriyas in their arms. O King! If you want to see it today, you will definitely see it. 52.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)