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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.21.48 
एवमुक्ते तत: कृष्ण: प्रत्युवाच महामना:।
स्निग्धगम्भीरया वाचा वाक्यं वाक्यविशारद:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
जब जरासंध ने ऐसा कहा, तब चतुर और वाक्पटु श्रीकृष्ण ने मृदु तथा गंभीर स्वर में इस प्रकार कहा।
 
When Jarasandha said this, the clever and eloquent Sri Krishna spoke in a soft and serious tone as follows. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)