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mahabharat 2.21.46: 'बताओ, ब्राह्मण की वीरता प्रायः उसके वचनों में होती है, कर्मों में नहीं। तुम लोगों ने जो पर्वत शिखर तोड़ने का कार्य किया है, वह तुम्हारी जाति और वेश-भूषा के सर्वथा विरुद्ध है। बताओ, आज तुम क्या विचार कर रहे हो?॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 2.21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.21.46 
वदध्वं वाचि वीर्यं च ब्राह्मणस्य विशेषत:।
कर्म चैतद् विलिङ्गस्थं किं वोऽद्य प्रसमीक्षितम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
'बताओ, ब्राह्मण की वीरता प्रायः उसके वचनों में होती है, कर्मों में नहीं। तुम लोगों ने जो पर्वत शिखर तोड़ने का कार्य किया है, वह तुम्हारी जाति और वेश-भूषा के सर्वथा विरुद्ध है। बताओ, आज तुम क्या विचार कर रहे हो?॥ 46॥
 
‘Tell me, a brahmin's bravery is usually in his words, not in his actions. The act of breaking the mountain peak that you people have done is completely against your caste and attire. Tell me what are you thinking today?॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)