Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.21.44: तुम लोग क्षत्रिय का वैभव धारण करते हो, परन्तु ब्राह्मण होने का ढोंग करते हो। तुम कौन हो जो अकारण ही नाना प्रकार के वस्त्र धारण करते हो, माला और चंदन लगाते हो? मुझे सत्य बताओ। राजाओं में सत्य ही शोभा देता है॥ 44॥ | mahabharat अध्याय 2.21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बिभ्रत: क्षात्रमोजश्च ब्राह्मण्यं प्रतिजानथ।
एवं विरागवसना बहिर्माल्यानुलेपना:।
सत्यं वदत के यूयं सत्यं राजसु शोभते॥ ४४॥
अनुवाद
तुम लोग क्षत्रिय का वैभव धारण करते हो, परन्तु ब्राह्मण होने का ढोंग करते हो। तुम कौन हो जो अकारण ही नाना प्रकार के वस्त्र धारण करते हो, माला और चंदन लगाते हो? मुझे सत्य बताओ। राजाओं में सत्य ही शोभा देता है॥ 44॥
‘You people wear the glory of a Kshatriya but you are pretending to be Brahmins. Who are you who are wearing different coloured clothes and wearing garlands and sandalwood without any reason? Tell me the truth. Truth is the only beauty in kings.॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥