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mahabharat 2.21.41: फिर वे सब बैठ गए। वे तीनों नरसिंह अपनी अतुलनीय शोभा से ऐसे चमक रहे थे जैसे किसी महान यज्ञ में तीन अग्नियाँ जल रही हों। 41॥   |   mahabharat अध्याय 2.21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.21.41 
अथोपविविशु: सर्वे त्रयस्ते पुरुषर्षभा:।
सम्प्रदीप्तास्त्रयो लक्ष्म्या महाध्वर इवाग्नय:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
फिर वे सब बैठ गए। वे तीनों नरसिंह अपनी अतुलनीय शोभा से ऐसे चमक रहे थे जैसे किसी महान यज्ञ में तीन अग्नियाँ जल रही हों। 41॥
 
Then they all sat down. Those three male lions were shining with their incomparable splendor like three fires burning in a great yagya. 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)