श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  2.21.38-39 
ते तु दृष्ट्वैव राजानं जरासंधं नरर्षभा:।
इदमूचुरमित्रघ्ना: सर्वे भरतसत्तम॥ ३८॥
स्वस्त्यस्तु कुशलं राजन्निति तत्र व्यवस्थिता:।
तं नृपं नृपशार्दूल प्रेक्षमाणा: परस्परम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे भरतवंश के प्रधान! वे सभी शत्रुओं का नाश करने वाले श्रेष्ठ पुरुष राजा जरासंध को देखकर इस प्रकार बोले - 'महाराज! आपका कल्याण हो।' जनमेजय! ऐसा कहकर वे तीनों उठकर कभी राजा जरासंध की ओर और कभी एक-दूसरे की ओर देखने लगे।
 
O head of the Bharata dynasty! All those best of men, destroyers of their enemies, on seeing King Jarasandha spoke thus - 'Maharaj! May you be blessed.' Janamejaya! Having said so, all three of them stood up and started looking sometimes at King Jarasandha and sometimes at each other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)