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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.21.37 
तांस्त्वपूर्वेण वेषेण दृष्ट्वा स नृपसत्तम:।
उपतस्थे जरासंधो विस्मितश्चाभवत् तदा॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उन तीनों को ऐसे अनोखे वेश में देखकर महाराज जरासंध को बड़ा आश्चर्य हुआ और वह उनके पास गए।
 
Seeing those three in such unique attire, the great king Jarasandha was very surprised. He went to them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)