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mahabharat 2.21.32-34h: तत्पश्चात् बलवान राजा ने उन तीनों अतिथियों से कहा, 'आप सबका स्वागत है।' जनमेजय! उस समय अर्जुन और भीमसेन चुप रहे। उनमें सबसे बुद्धिमान श्रीकृष्ण ने कहा, 'राजन्! इन दोनों ने प्रतिज्ञा की है, अतः ये आधी रात से पहले नहीं बोलेंगे। आधी रात के पश्चात् ये दोनों आपसे बातें करेंगे।' ॥32-33 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 2.21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद  »  श्लोक 32-34h
 
 
श्लोक  2.21.32-34h 
उवाच चैतान् राजासौ स्वागतं वोऽस्त्विति प्रभु:।
मौनमासीत् तदा पार्थभीमयोर्जनमेजय॥ ३२॥
तेषां मध्ये महाबुद्धि: कृष्णो वचनमब्रवीत्।
वक्तुं नायाति राजेन्द्र एतयोर्नियमस्थयो:॥ ३३॥
अर्वाङ्‍‍निशीथात् परतस्त्वया सार्धं वदिष्यत:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् बलवान राजा ने उन तीनों अतिथियों से कहा, 'आप सबका स्वागत है।' जनमेजय! उस समय अर्जुन और भीमसेन चुप रहे। उनमें सबसे बुद्धिमान श्रीकृष्ण ने कहा, 'राजन्! इन दोनों ने प्रतिज्ञा की है, अतः ये आधी रात से पहले नहीं बोलेंगे। आधी रात के पश्चात् ये दोनों आपसे बातें करेंगे।' ॥32-33 1/2॥
 
Thereafter the powerful king said to these three guests, 'You are all welcome.' Janmejaya! At that time Arjun and Bhimsen were silent. The wisest among them, Shri Krishna said this, 'King! These two have taken a vow; hence they will not speak before midnight. After midnight, these two will talk to you.' ॥ 32-33 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)