Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.21.28-29h: जैसे हिमालय की गुफाओं में रहने वाले सिंह गायों की खोज में आगे बढ़ते हैं, वैसे ही वे तीनों वीर राजमहल की खोज में वहाँ पहुँच गए थे। महाराज! युद्ध में विशेष रूप से सुशोभित उन तीनों वीरों की भुजाएँ टीके के समान सुन्दर लग रही थीं। उन पर चंदन और अगुरु का लेप लगा हुआ था। | mahabharat अध्याय 2.21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे हिमालय की गुफाओं में रहने वाले सिंह गायों की खोज में आगे बढ़ते हैं, वैसे ही वे तीनों वीर राजमहल की खोज में वहाँ पहुँच गए थे। महाराज! युद्ध में विशेष रूप से सुशोभित उन तीनों वीरों की भुजाएँ टीके के समान सुन्दर लग रही थीं। उन पर चंदन और अगुरु का लेप लगा हुआ था।
Just as the lions living in the caves of Himalayas move ahead in search of the cows, similarly those three brave men had reached there in search of the royal palace. Maharaj! The arms of those three brave men who were especially adorned in the war were looking as beautiful as the teeka logs. Sandalwood and aguru paste had been applied on them. 28 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥