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mahabharat 2.21.16: उस स्थान पर राजा बृहद्रथ ने ऋषभ नामक एक मांसाहारी राक्षस (जो बैल का रूप धारण किए हुए था) से युद्ध किया। उसे मारने के बाद, उन्होंने उसकी खाल से तीन बड़े-बड़े ढोल बनवाए, जिन्हें बजाने पर एक महीने तक ध्वनि उत्पन्न होती रही।   |   mahabharat अध्याय 2.21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.21.16 
यत्र मांसादमृषभमाससाद बृहद्रथ:।
तं हत्वा मासतालाभिस्तिस्रो भेरीरकारयत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उस स्थान पर राजा बृहद्रथ ने ऋषभ नामक एक मांसाहारी राक्षस (जो बैल का रूप धारण किए हुए था) से युद्ध किया। उसे मारने के बाद, उन्होंने उसकी खाल से तीन बड़े-बड़े ढोल बनवाए, जिन्हें बजाने पर एक महीने तक ध्वनि उत्पन्न होती रही।
 
At that place king Brihadratha fought with a carnivorous demon named Rishabha (who was in the form of a bull). After killing him, he had three large drums made from his skin which when struck would produce a sound for a month.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)