Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.21.11: इस प्रकार उस सुन्दर नगरी को, जो चारों ओर से दुर्जय थी, घेरकर जरासन्ध को यह अभिमान हो गया कि मैं अद्वितीय भौतिक समृद्धि प्राप्त करूँगा ॥11॥ | mahabharat अध्याय 2.21: श्रीकृष्णद्वारा मगधकी राजधानीकी प्रशंसा, चैत्यक पर्वतशिखर और नगाड़ोंको तोड़-फोड़कर तीनोंका नगर एवं राजभवनमें प्रवेश तथा श्रीकृष्ण और जरासंधका संवाद । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं प्राप्य पुरं रम्यं दुराधर्षं समन्तत:।
अर्थसिद्धिं त्वनुपमां जरासंधोऽभिमन्यते॥ ११॥
अनुवाद
इस प्रकार उस सुन्दर नगरी को, जो चारों ओर से दुर्जय थी, घेरकर जरासन्ध को यह अभिमान हो गया कि मैं अद्वितीय भौतिक समृद्धि प्राप्त करूँगा ॥11॥
Having thus surrounded that beautiful city, which was formidable from all sides, Jarasandha remained proud that he would attain unparalleled material prosperity. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥