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श्लोक 2.21.1  |
वासुदेव उवाच
एष पार्थ महान् भाति पशुमान् नित्यमम्बुमान्।
निरामय: सुवेश्माढॺो निवेशो मागध: शुभ:॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| श्रीकृष्ण बोले- कुन्तीनंदन! देखो, मगध की राजधानी कितनी सुन्दर और विशाल है। यहाँ अनेक पशु हैं। जल भी सदैव उपलब्ध रहता है। यहाँ रोगों का प्रकोप नहीं होता। सुन्दर महलों से परिपूर्ण यह नगरी अत्यंत शोभायमान लगती है। 1. |
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| Shri Krishna said- Kunti Nandan! Look, how beautiful and huge capital of Magadh is. There are many animals here. Water is also always available. There is no outbreak of diseases here. This city full of beautiful palaces looks very beautiful. 1. |
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