श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 20: युधिष्ठिरके अनुमोदन करनेपर श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीमसेनकी मगध-यात्रा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.20.9 
युधिष्ठिर उवाच
अच्युताच्युत मा मैवं व्याहरामित्रकर्शन।
पाण्डवानां भवान् नाथो भवन्तं चाश्रिता वयम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "हे अच्युत, हे अपनी मर्यादा से कभी विचलित न होने वाले शत्रुघ्न के सुदान! ऐसी बात न कहिए, न कहिए। आप हम सब पाण्डवों के स्वामी और रक्षक हैं; हम सब आपकी शरण में हैं।"
 
Yudhishthira said, "O Achyuta, O sudan of Shatrughan, who never deviates from his dignity! Do not say such a thing, do not say it. You are the lord and protector of all of us Pandavas; we all are in your refuge."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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