| श्री महाभारत » पर्व 2: सभा पर्व » अध्याय 20: युधिष्ठिरके अनुमोदन करनेपर श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीमसेनकी मगध-यात्रा » श्लोक 30 |
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| | | | श्लोक 2.20.30  | ते शश्वद् गोधनाकीर्णमम्बुमन्तं शुभद्रुमम्।
गोरथं गिरिमासाद्य ददृशुर्मागधं पुरम्॥ ३०॥ | | | | | | अनुवाद | | फिर गोरथ पर्वत पर पहुँचकर, जो सदैव पशुओं से भरा रहता था, जल से भरपूर था और सुन्दर वृक्षों से सुशोभित था, उन्होंने मगध की राजधानी देखी। | | | | Then reaching the Gorath mountain, which was always full of cattle, abundant with water and adorned with beautiful trees, he saw the capital of Magadha. | | | इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि जरासंधवधपर्वणि कृष्णपाण्डवमागधयात्रायां विंशोऽध्याय:॥ २०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत जरासंधवधपर्वमें कृष्ण, अर्जुन एवं भीमसेनकी मगधयात्राविषयक बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २०॥
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