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mahabharat 2.20.25: क्योंकि दोनों महात्मा ही क्षण-क्षण से लेकर प्रलयपर्यन्त सम्पूर्ण कर्मों के नियामक हैं और वे भगवान (नारायण) ही धर्म, काम और अर्थ में लगे हुए मनुष्यों को उनसे संबंधित कर्मों में लगाते हैं॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 2.20: युधिष्ठिरके अनुमोदन करनेपर श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीमसेनकी मगध-यात्रा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 20: युधिष्ठिरके अनुमोदन करनेपर श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीमसेनकी मगध-यात्रा  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.20.25 
ईशौ हि तौ महात्मानौ सर्वकार्यप्रवर्तिनौ।
धर्मकामार्थलोकानां कार्याणां च प्रवर्तकौ॥ २५॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि दोनों महात्मा ही क्षण-क्षण से लेकर प्रलयपर्यन्त सम्पूर्ण कर्मों के नियामक हैं और वे भगवान (नारायण) ही धर्म, काम और अर्थ में लगे हुए मनुष्यों को उनसे संबंधित कर्मों में लगाते हैं॥ 25॥
 
Because both the great souls are the controllers of all activities from moment to moment till the apocalypse, and the God (Narayan) who engages people engaged in Dharma, Kama and economic pursuits in the related activities.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)