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mahabharat 2.20.19: इसी प्रकार बुद्धि, युक्ति, बल, पुरुषार्थ और साधन-कुशलता से संपन्न श्रीकृष्ण को ही कार्य और उद्देश्य की सिद्धि के लिए सब कार्यों में आगे रखना सबके लिए उचित है। ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 2.20: युधिष्ठिरके अनुमोदन करनेपर श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीमसेनकी मगध-यात्रा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 20: युधिष्ठिरके अनुमोदन करनेपर श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीमसेनकी मगध-यात्रा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.20.19 
एवं प्रज्ञानयबलं क्रियोपायसमन्वितम्।
पुरस्कुर्वीत कार्येषु कृष्णं कार्यार्थसिद्धये॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार बुद्धि, युक्ति, बल, पुरुषार्थ और साधन-कुशलता से संपन्न श्रीकृष्ण को ही कार्य और उद्देश्य की सिद्धि के लिए सब कार्यों में आगे रखना सबके लिए उचित है। ॥19॥
 
Similarly, it is appropriate for everyone to put forward Sri Krishna, who is endowed with wisdom, strategy, strength, effort and resourcefulness, in all tasks for the accomplishment of the task and purpose. ॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)