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mahabharat 2.20.18: इसीलिए हम नीति और सदाचार के ज्ञाता प्रसिद्ध महापुरुष श्री गोविंद की शरण लेकर अपने लक्ष्य की प्राप्ति का प्रयत्न करते हैं ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 2.20: युधिष्ठिरके अनुमोदन करनेपर श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीमसेनकी मगध-यात्रा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 20: युधिष्ठिरके अनुमोदन करनेपर श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीमसेनकी मगध-यात्रा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.20.18 
तस्मान्नयविधानज्ञं पुरुषं लोकविश्रुतम्।
वयमाश्रित्य गोविन्दं यताम: कार्यसिद्धये॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इसीलिए हम नीति और सदाचार के ज्ञाता प्रसिद्ध महापुरुष श्री गोविंद की शरण लेकर अपने लक्ष्य की प्राप्ति का प्रयत्न करते हैं ॥18॥
 
That is why we try to achieve our goals by taking refuge in the famous great man Shri Govind, who is an expert in ethics and morality. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)