श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 19: चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.19.9 
देवैरपि विसृष्टानि शस्त्राण्यस्य महीपते।
न रुजं जनयिष्यन्ति गिरेरिव नदीरया:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महीपते! जैसे नदी का वेग पर्वत को हानि नहीं पहुँचा सकता, वैसे ही देवताओं द्वारा छोड़े गए अस्त्र-शस्त्र भी उसे हानि नहीं पहुँचा सकेंगे॥9॥
 
'Mahipate! Just as the force of a river cannot harm a mountain, similarly even the weapons released by the gods will not be able to harm it.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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