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mahabharat 2.19.7-8: पराक्रमी होकर वह समस्त मनोवांछित वस्तुओं को प्राप्त कर लेगा। जैसे अन्य पक्षी उड़ते हुए बाज की गति की बराबरी नहीं कर सकते, वैसे ही अन्य राजा भी इस शक्तिशाली राजकुमार के पराक्रम का अनुकरण नहीं कर सकेंगे। जो लोग उससे शत्रुता रखेंगे, वे नष्ट हो जाएँगे॥ 7-8॥   |   mahabharat अध्याय 2.19: चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 19: चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  2.19.7-8 
प्रापयिष्यति तत् सर्वं विक्रमेण समन्वित:।
अस्य वीर्यवतो वीर्यं नानुयास्यन्ति पार्थिवा:॥ ७॥
पततो वैनतेयस्य गतिमन्ये यथा खगा:।
विनाशमुपयास्यन्ति ये चास्य परिपन्थिन:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पराक्रमी होकर वह समस्त मनोवांछित वस्तुओं को प्राप्त कर लेगा। जैसे अन्य पक्षी उड़ते हुए बाज की गति की बराबरी नहीं कर सकते, वैसे ही अन्य राजा भी इस शक्तिशाली राजकुमार के पराक्रम का अनुकरण नहीं कर सकेंगे। जो लोग उससे शत्रुता रखेंगे, वे नष्ट हो जाएँगे॥ 7-8॥
 
‘By becoming mighty, he will achieve all the desired things. Just as other birds cannot match the speed of the flying eagle, similarly other kings will not be able to emulate the valour of this powerful prince. Those who will be hostile towards him will be destroyed.॥ 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)