श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 19: चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.19.6 
अस्य रूपं च सत्त्वं च बलमूर्जितमेव च।
एष श्रिया समुदित: पुत्रस्तव न संशय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उसमें सौन्दर्य, सात्विकता, बल और तेज का विशेष आविर्भाव होगा। इसमें संदेह नहीं कि तुम्हारा यह पुत्र राज्य-धन से युक्त होगा॥6॥
 
‘There will be a special manifestation of beauty, goodness, strength and energy in him. There is no doubt that this son of yours will be blessed with the wealth of the kingdom.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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