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mahabharat 2.19.4-5: महाराज! राजा से प्राप्त वंदना स्वीकार करके महाप्रतापी ऋषि ने मगधराज को संबोधित करके प्रसन्न मन से कहा - 'राजन्! जरासंध के जन्म से लेकर अब तक का सब कुछ मैं दिव्य दृष्टि से जान चुका हूँ। राजन्! अब सुनिए कि भविष्य में आपका पुत्र कैसा होगा?॥ 4-5॥   |   mahabharat अध्याय 2.19: चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 19: चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  2.19.4-5 
प्रतिगृह्य च तां पूजां पार्थिवाद् भगवानृषि:।
उवाच मागधं राजन् प्रहृष्टेनान्तरात्मना॥ ४॥
सर्वमेतन्मया ज्ञातं राजन् दिव्येन चक्षुषा।
पुत्रस्तु शृणु राजेन्द्र यादृशोऽयं भविष्यति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! राजा से प्राप्त वंदना स्वीकार करके महाप्रतापी ऋषि ने मगधराज को संबोधित करके प्रसन्न मन से कहा - 'राजन्! जरासंध के जन्म से लेकर अब तक का सब कुछ मैं दिव्य दृष्टि से जान चुका हूँ। राजन्! अब सुनिए कि भविष्य में आपका पुत्र कैसा होगा?॥ 4-5॥
 
Maharaj! After accepting the worship received from the king, the glorious sage addressed the king of Magadhan and said with a happy heart - 'King! From the birth of Jarasandha till now, I have come to know everything through divine sight. King! Now listen to what your son will be like in the future?॥ 4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)