श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 19: चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.19.28 
एवमेव तदा वीर बलिभि: कुकुरान्धकै:।
वृष्णिभिश्च महाराज नीतिहेतोरुपेक्षित:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वीर राजन! इसी नीति का पालन करने के लिए उस समय पराक्रमी कुकुर, अंधक तथा वृष्णिवंश के योद्धाओं ने जरासंध की उपेक्षा की ॥28॥
 
Brave King! In order to follow this policy, at that time the mighty Kukur, Andhak and the warriors of Vrishni dynasty ignored Jarasandha. 28॥
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि राजसूयारम्भपर्वणि जरासंधप्रशंसायामेकोनविंशतितमोऽध्याय:॥ १९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत राजसूयारम्भपर्वमें जरासंधप्रशंसाविषयकउन्नीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९॥

 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas