श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 19: चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.19.12 
एष श्रिय: समुदिता: सर्वराज्ञां ग्रहीष्यति।
वर्षास्विवोदीर्णजला नदीर्नदनदीपति:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'वह समस्त राजाओं द्वारा संचित समस्त धन को अपने अधीन कर लेगा, जैसे समस्त नदियों का स्वामी समुद्र वर्षा ऋतु में उफनती हुई नदियों को अपने अधीन कर लेता है।॥12॥
 
'It will take under its control all the wealth accumulated by all kings, just as the ocean, the lord of all rivers, takes under itself the rivers with swollen waters during the rainy season.॥ 12॥
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