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mahabharat 2.19.11: जिस प्रकार पतंगे आग में जलकर राख हो जाते हैं, उसी प्रकार सेना और घुड़सवारों सहित एक समृद्ध राजा भी आग से टकराकर नष्ट हो जाएगा।   |   mahabharat अध्याय 2.19: चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 19: चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.19.11 
एनमासाद्य राजान: समृद्धबलवाहना:।
विनाशमुपयास्यन्ति शलभा इव पावकम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार पतंगे आग में जलकर राख हो जाते हैं, उसी प्रकार सेना और घुड़सवारों सहित एक समृद्ध राजा भी आग से टकराकर नष्ट हो जाएगा।
 
Just as moths burn to ashes in a fire, similarly a prosperous king with his army and cavalry will be destroyed upon colliding with it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)