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mahabharat 2.18.5: और तुम्हारे घर की दीवारों पर मेरा एक चित्र बना हुआ है, जिसमें मैं अनेक पुत्रों से घिरी हुई खड़ी हूँ। उस चित्र के रूप में गंध, पुष्प, धूप और भक्ष्य पदार्थों से मेरी पूजा की गई है॥5॥   |   mahabharat अध्याय 2.18: जरा राक्षसीका अपना परिचय देना और उसीके नामपर बालकका नामकरण होना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 18: जरा राक्षसीका अपना परिचय देना और उसीके नामपर बालकका नामकरण होना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.18.5 
लिखिता चैव कुडॺेषु पुत्रैर्बहुभिरावृता।
गन्धपुष्पैस्तथा धूपैर्भक्ष्यभोज्यै: सुपूजिता॥ ५॥
 
 
अनुवाद
और तुम्हारे घर की दीवारों पर मेरा एक चित्र बना हुआ है, जिसमें मैं अनेक पुत्रों से घिरी हुई खड़ी हूँ। उस चित्र के रूप में गंध, पुष्प, धूप और भक्ष्य पदार्थों से मेरी पूजा की गई है॥5॥
 
And a picture of mine has been painted on the walls of your house in which I am standing surrounded by many sons. In the form of that picture, I have been worshipped with fragrance, flowers, incense and edible items. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)