Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.17.d6: महाराज! इस फल से आपको पुत्र की प्राप्ति होगी, अब आपको वन में जाकर तपस्या नहीं करनी चाहिए, बल्कि धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करना चाहिए। यही राजाओं का धर्म है। | mahabharat अध्याय 2.17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(एष ते तनयो राजन् मा तप्सीस्त्वं तपो वने।
प्रजा: पालय धर्मेण एष धर्मो महीक्षिताम्॥
अनुवाद
महाराज! इस फल से आपको पुत्र की प्राप्ति होगी, अब आपको वन में जाकर तपस्या नहीं करनी चाहिए, बल्कि धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करना चाहिए। यही राजाओं का धर्म है।
Maharaj! This fruit will give you a son, now you should not go to the forest and do penance; you should take care of your subjects righteously. This is the religion of kings.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥