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mahabharat 2.17.d4: 'इस वृद्धावस्था में निःसंतान होने के कारण मुझे राज्य से क्या प्रयोजन? अतः अब मैं अपनी दोनों पत्नियों के साथ तपोवन में रहकर तपस्या करूँगा।'   |   mahabharat अध्याय 2.17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.17.d4 
तादृशस्य हि राज्येन वृद्धत्वे किं प्रयोजनम्।
सोऽहं तपश्चरिष्यामि पत्नीभ्यां सहितो वने॥
 
 
अनुवाद
'इस वृद्धावस्था में निःसंतान होने के कारण मुझे राज्य से क्या प्रयोजन? अतः अब मैं अपनी दोनों पत्नियों के साथ तपोवन में रहकर तपस्या करूँगा।'
 
'What use do I have of the kingdom in this old age, being childless? Therefore, now I will live in Tapovan with both my wives and perform penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)