श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.17.7 
व्यूढानीकैरतिबलैर्न युद्धॺेदरिभि: सह।
इति बुद्धिमतां नीतिस्तन्ममापीह रोचते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जिनकी सेनाएँ पंक्तिबद्ध खड़ी हों और जो अत्यंत बलवान हों, उनके साथ (आमने-सामने) युद्ध नहीं करना चाहिए; यही बुद्धिमानों की नीति है। यहाँ भी यही नीति मेरे अनुकूल है ॥7॥
 
One should not fight (face to face) with enemies whose armies are standing in formation and who are extremely strong; this is the policy of the wise. This policy suits me here too. ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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