Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.17.51: यह सब देखकर और सुनकर राजा के हर्ष का पारावार न रहा। उसने उस राक्षसी से, जो सोने के समान चमकती थी, परन्तु राक्षसी के समान नहीं दिखती थी, इस प्रकार पूछा॥ 51॥ | mahabharat अध्याय 2.17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: स राजा संहृष्ट: सर्वं तदुपलभ्य च।
अपृच्छद्धेमगर्भाभां राक्षसीं तामराक्षसीम्॥ ५१॥
अनुवाद
यह सब देखकर और सुनकर राजा के हर्ष का पारावार न रहा। उसने उस राक्षसी से, जो सोने के समान चमकती थी, परन्तु राक्षसी के समान नहीं दिखती थी, इस प्रकार पूछा॥ 51॥
Seeing and hearing all this, the king's joy knew no bounds. He asked the demoness who had the luster of gold, but who did not look like a demoness in appearance, thus.॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥