Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.17.49: राक्षसी बोली - बृहद्रथ! यह तुम्हारा पुत्र है, जिसे मैंने तुम्हें दिया है। कृपया इसे स्वीकार करो। यह ब्रह्मर्षि के वरदान और आशीर्वाद से तुम्हारी पत्नियों के गर्भ से उत्पन्न हुआ है। धाय-धात्रीयों ने इसे घर के बाहर फेंक दिया था, किन्तु मैंने इसकी रक्षा की है। | mahabharat अध्याय 2.17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राक्षसी बोली - बृहद्रथ! यह तुम्हारा पुत्र है, जिसे मैंने तुम्हें दिया है। कृपया इसे स्वीकार करो। यह ब्रह्मर्षि के वरदान और आशीर्वाद से तुम्हारी पत्नियों के गर्भ से उत्पन्न हुआ है। धाय-धात्रीयों ने इसे घर के बाहर फेंक दिया था, किन्तु मैंने इसकी रक्षा की है।
The demoness said - Brihadratha! This is your son whom I have given you. Please accept him. He was born from the womb of your wives due to the boon and blessings of Brahmarshi. The nurses had thrown him outside the house but I have protected him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥