Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.17.46-47: दोनों रानियों को दुःखी, राजा को संतान प्राप्ति की लालसा तथा बालक को अत्यंत बलवान देखकर राक्षसी ने सोचा, 'मैं इस राजा के राज्य में रहती हूँ। यह पुत्र-प्राप्ति की इच्छा रखता है; अतः इस धर्मपरायण तथा महान राजा के बालक को मारना मेरे लिए उचित नहीं है।' | mahabharat अध्याय 2.17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दोनों रानियों को दुःखी, राजा को संतान प्राप्ति की लालसा तथा बालक को अत्यंत बलवान देखकर राक्षसी ने सोचा, 'मैं इस राजा के राज्य में रहती हूँ। यह पुत्र-प्राप्ति की इच्छा रखता है; अतः इस धर्मपरायण तथा महान राजा के बालक को मारना मेरे लिए उचित नहीं है।'
Seeing the two queens sad, the king eager to have a child and the child so strong, the demoness thought, 'I live in this king's kingdom. He desires a son; therefore, it is not right for me to kill the child of this pious and great king.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥