श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.17.39 
ते चतुष्पथनिक्षिप्ते जरा नामाथ राक्षसी।
जग्राह मनुजव्याघ्र मांसशोणितभोजना॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! चौराहे पर फेंके गए उन टुकड़ों को जरा नामक राक्षसी ने उठा लिया, जो रक्त और मांस खाती है।।39।।
 
Purushsingh! Those pieces thrown at the crossroads were picked up by a demoness named Jara who eats blood and flesh. 39.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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