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श्लोक  2.17.32 
यथासमयमाज्ञाय तदा स नृपसत्तम:।
द्वाभ्यामेकं फलं प्रादात् पत्नीभ्यां भरतर्षभ॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! उस श्रेष्ठ राजा ने उचित समय का विचार करके वह एक फल अपनी दोनों पत्नियों को दे दिया।
 
O best of the Bharatas! After considering the appropriate time, that excellent king gave that one fruit to both his wives.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)