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mahabharat 2.17.20-21: राजा ने अपनी सारी युवावस्था सांसारिक सुखों में बिता दी, परन्तु उसे वंश चलाने के लिए पुत्र नहीं मिला। उस महान राजा ने अनेक शुभ अनुष्ठान, होम और पुत्रयेष्टि यज्ञ किए, परन्तु फिर भी उसे वंश बढ़ाने के लिए पुत्र नहीं मिला।॥ 20-21॥   |   mahabharat अध्याय 2.17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.17.20-21 
विषयेषु निमग्नस्य तस्य यौवनमभ्यगात्॥ २०॥
न च वंशकर: पुत्रस्तस्याजायत कश्चन।
मङ्गलैर्बहुभिर्होमै: पुत्रकामाभिरिष्टिभि:।
नाससाद नृपश्रेष्ठ: पुत्रं कुलविवर्धनम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजा ने अपनी सारी युवावस्था सांसारिक सुखों में बिता दी, परन्तु उसे वंश चलाने के लिए पुत्र नहीं मिला। उस महान राजा ने अनेक शुभ अनुष्ठान, होम और पुत्रयेष्टि यज्ञ किए, परन्तु फिर भी उसे वंश बढ़ाने के लिए पुत्र नहीं मिला।॥ 20-21॥
 
The king spent his entire youth immersed in worldly pleasures, but he did not get a son to carry on his lineage. That great king performed many auspicious ceremonies, homas and putrayeshti yagnas, but still he did not get a son to increase his lineage.॥ 20-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)