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mahabharat 2.17.19-20h: जब वे अपनी दोनों पत्नियों के बीच बैठते, तो ऐसा प्रतीत होता मानो गंगा और यमुना के मध्य में समुद्र का अवतार हो रहा हो ॥19 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 2.17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  2.17.19-20h 
तयोर्मध्यगतश्चापि रराज वसुधाधिप:॥ १९॥
गङ्गायमुनयोर्मध्ये मूर्तिमानिव सागर:।
 
 
अनुवाद
जब वे अपनी दोनों पत्नियों के बीच बैठते, तो ऐसा प्रतीत होता मानो गंगा और यमुना के मध्य में समुद्र का अवतार हो रहा हो ॥19 1/2॥
 
When he would sit between his two wives, it would appear as if the ocean incarnate in the middle of the Ganga and the Yamuna is being beautified. ॥19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)