Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.17.11: युधिष्ठिर ने पूछा - हे कृष्ण! यह जरासंध कौन है? इसका बल और पराक्रम क्या है कि प्रज्वलित अग्नि के समान आपको स्पर्श करके भी यह पतंगे के समान जलकर भस्म नहीं हो गया?॥11॥ | mahabharat अध्याय 2.17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
कृष्ण कोऽयं जरासंध: किंवीर्य: किम्पराक्रम:।
यस्त्वां स्पृष्ट्वाग्निसदृशं न दग्ध: शलभो यथा॥ ११॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - हे कृष्ण! यह जरासंध कौन है? इसका बल और पराक्रम क्या है कि प्रज्वलित अग्नि के समान आपको स्पर्श करके भी यह पतंगे के समान जलकर भस्म नहीं हो गया?॥11॥
Yudhishthira asked - Lord Krishna! Who is this Jarasandha? What is his strength and valour that even after touching you like a blazing fire, he did not burn to ashes like a moth?॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥