श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.17.1 
वासुदेव उवाच
जातस्य भारते वंशे तथा कुन्त्या: सुतस्य च।
या वै युक्ता मति: सेयमर्जुनेन प्रदर्शिता॥ १॥
 
 
अनुवाद
भगवान् श्रीकृष्ण बोले - राजन् ! भरतवंश में उत्पन्न हुए और कुन्ती जैसी माता के पुत्र जैसी बुद्धि वाले मनुष्य में वैसी ही बुद्धि होनी चाहिए, उसी का परिचय अर्जुन ने यहाँ दिया है ॥1॥
 
Lord Shri Krishna said – King! A man born in the Bharat dynasty and having the intelligence of a son of a mother like Kunti should have the same intelligence, Arjun has introduced the same here. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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