श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 16: जरासंधको जीतनेके विषयमें युधिष्ठिरके उत्साहहीन होनेपर अर्जुनका उत्साहपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.16.7 
अर्जुन उवाच
धनु: शस्त्रं शरा वीर्यं पक्षो भूमिर्यशो बलम्।
प्राप्तमेतन्मया राजन् दुष्प्रापं यदभीप्सितम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - हे राजन! धनुष, अस्त्र, बाण, पराक्रम, उत्तम सहायक, भूमि, यश और बल ये सब दुर्लभ हैं, ये सब मुझे अपनी इच्छा के अनुसार प्राप्त हो गए हैं।
 
Arjun said - O King! Bow, arms, arrows, valour, excellent assistants, land, fame and strength are very difficult to obtain; but I have obtained all these rare things according to my desire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)