श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 16: जरासंधको जीतनेके विषयमें युधिष्ठिरके उत्साहहीन होनेपर अर्जुनका उत्साहपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.16.3 
जरासंधबलं प्राप्य दुष्पारं भीमविक्रमम्।
यमोऽपि न विजेताऽऽजौ तत्र व: किं विचेष्टितम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जरासंध की सेना पर विजय पाना कठिन है। उसका पराक्रम भयानक है। युद्ध में उस सेना का सामना करके यमराज भी विजयी नहीं हो सकते, फिर वहाँ आपके पुरुषार्थ से क्या होगा?॥3॥
 
It is difficult to overcome the army of Jarasandha. His might is terrifying. Even Yamraj cannot be victorious by facing that army in battle, then what can your efforts do there?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)