श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 16: जरासंधको जीतनेके विषयमें युधिष्ठिरके उत्साहहीन होनेपर अर्जुनका उत्साहपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.16.15 
जरासंधविनाशं च राज्ञां च परिरक्षणम्।
यदि कुर्याम यज्ञार्थं किं तत: परमं भवेत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यदि हम राजसूय यज्ञ की सफलता के लिए जरासंध का नाश कर सकें और बंदी बनाए गए राजाओं को बचा सकें, तो इससे बढ़कर और क्या बात हो सकती है? ॥15॥
 
If we can destroy Jarasandha and save the imprisoned kings for the success of the Rajasuya Yagya, then what can be better than this? ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)