श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 16: जरासंधको जीतनेके विषयमें युधिष्ठिरके उत्साहहीन होनेपर अर्जुनका उत्साहपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.16.14 
दैन्यं यथा बलवति तथा मोहो बलान्विते।
तावुभौ नाशकौ हेतू राज्ञा त्याज्यौ जयार्थिना॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जैसे बलवान पुरुष में नम्रता एक बड़ा दोष है, वैसे ही बलवान पुरुष में आसक्ति भी एक बड़ा दुर्गुण है। नम्रता और आसक्ति दोनों ही विनाश के कारण हैं; अतः विजय चाहने वाले राजा के लिए इन दोनों का त्याग कर देना चाहिए॥14॥
 
Just as meekness is a grave fault in a strong man, similarly, attachment is also a great vice in a strong man. Both meekness and attachment are the causes of destruction; hence, both of them are to be discarded for a king who wants victory.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)