श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 16: जरासंधको जीतनेके विषयमें युधिष्ठिरके उत्साहहीन होनेपर अर्जुनका उत्साहपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.16.11 
सर्वैरपि गुणैर्युक्तो निर्वीर्य: किं करिष्यति।
गुणीभूता गुणा: सर्वे तिष्ठन्ति हि पराक्रमे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
दुर्बल मनुष्य सर्वगुण संपन्न होने पर भी क्या करेगा? वीरता में तो सभी गुण उसके अंग बन जाते हैं॥11॥
 
What will a weak person do even if he is endowed with all the virtues? In valour, all the virtues become a part of him.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)